Saturday, 6 July 2019

रामानुजन्

यो यो यां यां तनुं भक्तः, श्रद्धयार्चितुमिच्छति !
तस्य तस्याचलां श्रद्धां, तामेव विदधाम्यहम् !!
भगवद्गीता ७ - २१ गीता में भगवान कहते हैं कि मैं भक्त की श्रद्धा उसके इष्टदेव में दृढ़ करता हूँ । 
तुलसी मस्तक तब नवै धनुष बाण लेउ हाथ !
यह श्रद्धा यूँ ही नहीं दृढ़ हो जाती । इष्टदेव मनोकामना पूरी करते हैं, सन्मार्ग पर चलने का अवसर उत्पन्न करते हैं । संकटों में स्मरण करने पर संकट निवारण करते हैं । तब न तिरुपति बाला जी से ले कर गाँव के छोटे से शिवाले तक पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है । यही भगवान का असली विश्वरूप है ।
श्रीनिवास रामानुजन(१८८७-१९२०) भारत में पिछली कई शताब्दियों में उत्पन्न होने वाले महानतम गणितज्ञ थे और नामगिरी देवी उनकी इष्ट थीं जो दक्षिण में विष्णु की पत्नी लक्ष्मी का रूप मानी जाती हैं । रामानुजन की गणित में इतनी रुचि थी कि गणित के अतिरिक्त वह सभी विषयों में फेल हो जाते थे और बीए तक नहीं कर सके । स्वप्न तक गणितमय थे उनके , नामगिरी देवी आती थीं और स्वप्न में ही कुछ संख्या और सूत्र बोर्ड पर लिख जाती थीं जिन्हें रामानुजन स्मरण कर लेते थे और आगे उन पर शोध करते थे ।
पढ़ाई छूट जाने के कारण उनका जीवन कष्टमय हो गया यद्यपि हाईस्कूल के अंकों के आधार पर छात्रवृत्ति मिल रही थी मगर ११वीं में फेल हो गये । मद्रास पोर्ट ट्रस्ट में छोटी सी नौकरी से गुज़ारा होता था किंतु ख्याति दुनिया भर में फैल गई और इंगलैंड से प्रसिद्ध गणितज्ञ हार्डी का बुलावा आ गया । पत्नी जानकी को यहीं छोड़ना पड़ा । कैंब्रिज में उन्होंने शोध किया और बीए की डिग्री भी प्राप्त की ।
रामानुजन ने अपने छोटे से जीवन मे ३८८० से अधिक गणितीय प्रमेय खोजीं और अभी हमारा विज्ञान इतना उन्नत नहीं हो सका है कि उनके द्वारा खोजे गये सभी सूत्रों को उपयोग में ला सके ।
क्रिस्टल विज्ञान से लेकर ब्रह्मांड के रहस्यों की खोज में रामानुजन के सूत्र काम आते हैं ।
हार्डी उनको अस्पताल में देखने जा रहे थे जिस टैक्सी से वह गये उसका नंबर 1729 था , हार्डी ने कहा यह नंबर बहुत बेकार सा नंबर है कुछ अपशकुन तो नहीं है । रामानुजन बोले यह एक अद्भुत सबसे छोटी संख्या है जो दो घन संख्याओं के योग को दो अलग अलग ढंग से दर्शाती है ।
१×१×१+१२×१२×१२= १७२९
तथा
९×९×९+१०×१०×१०= १७२९
१७२९ संख्या को हार्डी रामानुजन संख्या के नाम से जाना जाता है ।
यह अनायास ही नहीं है कि बेंजामिन नेतनयाहू ने भारत के तमाम महापुरुषों को छोड़ कर श्रीनिवास रामानुजन को भारत की पहचान के रूप में याद किया । भारत ने संसार को शून्य और दशमलव प्रणाली दी है अन्यथा रोमन अंकों में गणित की प्रगति संभव ही न थी ।
राजकमल गोस्वामी

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