Saturday, 6 July 2019

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का पतन

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का पतन उत्तर प्रदेश के शनै: शनै: राजनैतिक पतन का सीधा परिणाम है । स्वतंत्रता के बाद कई दशकों तक इलाहाबाद एक मात्र परीक्षा केंद्र होता था । प्रतियोगी छात्र अपना राशन पानी ले कर इलाहाबाद के मोहल्लों में किराये का मकान लेकर डेरा डाल देते थे और घर द्वार छोड़ कर परीक्षा की तैयारी में जुट जाते थे । ममफोर्ड गंज , पुराना कटरा , अलोपी बाग , कीडगंज से लेकर ख़ुल्दाबाद के लगे मोहल्लों में भी छात्रों की भीड़ देखी जा सकती थी । कटरा चौराहे पर रात भर चाय की दुकानें गुलज़ार रहती थीं ।
विश्वविद्यालय के छात्रावास भी इन्हीं प्रतियोगी छात्रों के अड्डे थे । और जब पीसीएस का नतीजा निकलता था तो मोहल्लेवार छात्र चयनित होते थे । मम्फोर्डगंज से दस , कटरा से १५ गंगानाथ झा से २० इस तरह से छात्रों का चयन होता था । गणित में शत प्रतिशत अंक लाने वालों से कला विषय वाले बहुत नाराज़ रहते थे और अपना रोष भी प्रदर्शित करते थे । 
जिस स्तर के छात्र चयनित होते थे उनकी आर्थिक सामाजिक और शैक्षिक पृष्ठभूमि देख कर कभी ऐसा नहीं महसूस होता था कि परीक्षा में बेईमानी भी हो सकती थी । जो बच्चे नहीं चयनित होते थे वह फिर से उत्साह के साथ अगली परीक्षा की तैयारी में जुट जाते थे ।
काँग्रेस के नाम से आज लोग चिढ़ते हैं लेकिन तब काँग्रेस की ही सरकारें होती थीं । सदस्यों की ईमानदारी असंदिग्ध हुआ करती थी । कम से कम वीपी सिंह के मुख्यमंत्रीकाल तक तो ईमानदारी का ही बोलबाला था ।
फिर आई स्केलिंग प्रणाली जिसमें आयोग को अधिकार मिल गया कि वह विभिन्न विषयों में प्राप्त अंकों का रुझान देखते हुए छात्रों के प्राप्तांकों के साथ छेड़छाड़ कर सके । यानी अगर गणित में अधिकतर छात्रों के नब्बे से अधिक अंक हों तो इतिहास भूगोल जैसे कम स्कोरिंग वाले विषयों में छात्रों के अंक बढ़ा दिये जायें ।
एक बार आयोग को कॉपी में छेड़छाड़ का मौका मिला तो पतन शुरू हो गया । नम्बरों की स्केलिंग का फार्मूला क्या होगा यह कभी आयोग ने सुप्रीम कोर्ट तक को नहीं बताया ।
सन ८९ से प्रदेश में सामाजिक न्याय वाली जातिवादी सरकारों का बोलबाला हो गया । आयोग के मुँह में खून लग चुका था तो मर्यादायें भी नष्ट होने लगीं । अब तो तीस वर्ष हो गये , पर्चा आउट होना आम बात हो चुकी है ।
आयोग की विश्वसनीयता नष्ट हो चुकी है । अब तो सिस्टम में आमूल चूल परिवर्तन के लिये आयोग को पूरी तरह भंग कर के नया आयोग बनाने का समय आ गया है ।
अब तो इस तालाब का पानी बदल दो ।

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