यदि मानवता से केवल यहूदियों के योगदान को निकाल दिया जाये तो हम फिर से अंधेरे युग में प्रवेश कर जायेंगे ।
आज बिजली के बल्ब, एक्स रे, पोलियो वैक्सीन, स्टैनलेस स्टील , न्यूक्लियर एनर्जी से लेकर गूगल और फेसबुक तक यहूदियों की देन है । जो लोग धर्मांध हैं और केवल अपनी धार्मिक परंपरा के कारण यहूदियों से घृणा करते हैं वे कृतघ्न हैं । अब तक यहूदियों को १९० के लगभग नोबेल पुरस्कार मिल चुके हैं जबकि दुनिया में उनकी आबादी २% भी नहीं है ।
विल्हम रॉन्जन के घर एक उद्योगपति पहुँचा उस समय वह अपने गमलों में काम कर रहे थे । उद्योगपति ने उन्हें माली समझा और अपना कार्ड महान वैज्ञानिक तक पहुँचाने को कहा । रॉन्जन ने उसे ड्राइंग रूम में बिठा कर दो घंटे प्रतीक्षा करने को कहा और अपना काम करते रहे । दो घंटे बाद रॉन्जन तैयार हो कर उसके पास आये । उद्योगपति को बहुत आश्चर्य हुआ , उसने १० लाख डॉलर में उन किरणों का पेटेंट हासिल करने का प्रस्ताव रखा और यह भी कहा इन किरणों का नाम मैं आप के नाम पर रॉन्जन रेज़ रखना चाहता हूँ ।
रॉन्जन नें अत्यंत विनम्रतापूर्वक उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कहा कि यदि मेरी खोज मानवता के किसी काम आ सकती है तो मुझे खुशी होगी लेकिन इस खोज का श्रेय सम्पूर्ण मानव जाति को जाता है । न तो मैं इसका पेटेंट हासिल करूँगा और न इन किरणों को अपना नाम दूँगा । ये किरणें ऐक्सरे के नाम से जानी जायेंगी ।
रॉन्जन नें अत्यंत विनम्रतापूर्वक उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कहा कि यदि मेरी खोज मानवता के किसी काम आ सकती है तो मुझे खुशी होगी लेकिन इस खोज का श्रेय सम्पूर्ण मानव जाति को जाता है । न तो मैं इसका पेटेंट हासिल करूँगा और न इन किरणों को अपना नाम दूँगा । ये किरणें ऐक्सरे के नाम से जानी जायेंगी ।
विल्हम रॉन्जन उन महान यहूदियों में से एक थे जिन्होंने हमारी ज़िंदगी आसान बनाने के लिये जीवन भर संघर्ष किया । मानवता यहूदियों की कृतज्ञ रहेगी ।
राजकमल गोस्वामी
No comments:
Post a Comment