लिंगायत की अलग धर्म घोषित करने की माँग का मैं समर्थन करता हूँ ! हिंदुओं के सारे मंदिर देवस्थान इसीलिये सरकार ने कब्ज़े में ले लिये कि वह बहुसंख्यक समुदाय के घर्मस्थल थे ! यह देश अल्पसंख्यकों के लिये स्वर्ग है ! आप अपनी धार्मिक शिक्षा संस्थायें चला सकते हैं ! आपके धर्मस्थलों से होने वाली आय आपकी होगी उसे सरकार मनमानी तरह से खर्च नहीं कर सकती ! बहुसंख्यकों के लिये देश दिनोदिन नर्क बनता जा रहा है ! स्कूलों में गीता नहीं पढ़ाई जा सकती ! धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती ! यदि भारत एक धार्मिक राष्ट्र होता तो अल्पसंख्यकों को विशेष अधिकार देना न्यायसंगत होता लेकिन एक धर्मनिरपेक्ष शासन व्यवस्था में तो सभी धर्मों को समान संरक्षण मिलना चाहिये ! वर्ष ८७ के आस पास काशी विश्वनाथ मंदिर का अधिग्रहण किया गया ! मंदिर के तत्कालीन प्रबंधन ने इस अधिग्रहण को सुप्रीम कोर्ट तक चुनौती दी ! अपनी दलील में उन्होंने शैव संप्रदाय को पृथक धर्म और इस प्रकार अल्पसंख्यक समुदाय घोषित करने की भी प्रार्थना की किन्तु मुकदमा हार गये ! काशी विश्वनाथ सरकारी मंदिर हो गया ! इसके प्रबंधन और कार्यकारिणी में कई सरकारी अधिकारी पदेन सदस्य होते हैं जो किसी भी धर्म के हो सकते हैं ! अभी कुछ ही समय पूर्व मंदिर में पूजा करवाने के लिये २००००/- प्रति माह पर अर्चकों की नियुक्ति हेतु विज्ञापन मेरी नजर से गुज़रे थे ! सरकारी अफसरों ने तो एयर इंडिया और अशोक होटल जैसे संस्थानों को खोखला कर दिया तो मंदिर को क्या नहीं बेच खायेंगे ? मंदिरों की पूजा अर्चनानिर्बाध चलती रहे , यात्रियों और श्रद्धालुओं की भावनाओं को जितना उस धर्म का धर्मावलंबी समझ सकता है उतना सरकार कभी नहीं समझ सकती और एक धर्म निरपेक्ष सरकार को इस चक्कर में पड़ना भी नहीं चाहिये ! लेकिन मंदिर की धन संपदा और संपन्नता पर सरकारों की नज़र महमूद गज़नवी की तरह लगी रहती है ! अल्प संख्यक होने पर सरकार आपको लूटने की बजाय कुछ सबसिडी देगी ! प्रधानमंत्री चादर भिजवायेंगे ! आप अपनी परंपराओं की रक्षा कर सकेंगे ! मेरा मानना है कि हिंदू धर्म के धर्मस्थलों पर सरकार की गृद्ध दृष्टि को देखते हुए हिंदू धर्म से अलग हो जाना ही श्रेयस्कर है ! शैव, वीरशैव, लिंगायत, शाक्त , वैष्णव, कबीरपंथी, दादूपंथी, स्वामीनारायण मार्गी, आर्य समाजी , सनातनी आदि सब को अलग धर्म घोषित कर देना चाहिये । इस तरह सभी अल्पसंख्यक हो जायेंगे और सुरक्षित रहेंगे !
राजकमल गोस्वामी
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